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विवादों से पुराना नाता है जस्टिस कर्णन का, SC के चीफ जज को सुना चुके हैं सजा

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कोलकाता हाईकोर्ट के जस्टिस सीएस कर्णन और सुप्रीम कोर्ट के बीच खींचतान लगातार जारी है. सोमवार को कर्णन ने भारत के चीफ जस्टिस जेएस खेहर और उच्चतम न्यायालय के सात और जजों को एक ‘दलित न्यायाधीश’ (खुद कर्णन) को प्रताड़ित करने का दोषी ठहराते हुए पांच साल के कठिन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

अब सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस कर्णन को अदालत की अवमानना मामले में छह महीने जेल की सजा सुना दी है. बता दें कि वह पहले सिटिंग जज हैं जिन्हें जेल की सजा सुनाई गई है. इससे पहले इसी साल फरवरी के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने कर्णन को अदालत की अवमानना का नोटिस भेजा था. तब कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी सिटिंग जज को नोटिस थमाए जाने के अधिकार पर सवाल खड़े किए थे.

विवादों से गहरा नाता
जस्टिस कर्णन का विवादों से गहरा नाता रहा है. कोलकाता हाईकोर्ट में पदस्त जस्टिस कर्णन को मार्च 2009 में मद्रास हाईकोर्ट का एडिशनल जज नियुक्त किया गया था. इसके बाद वह लगातार जजों और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपने अलग-अलग बयानों की वजह से खबरों में बने रहे. 2011 में उन्होंने आरोप लगाए थे कि उनके (कर्णन के) दलित होने की वजह से उन्हें दूसरे जजों द्वारा प्रताड़ित किया जाता रहा है.

बता दें कि सबसे पहले वह सुर्खियों में तब आए थे जब उन्होंने 2011 में अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग को चिट्ठी लिखी कि दलित होने की वजह से उन्हें अन्य जजों द्वारा उत्पीड़ित किया जाता रहा है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे जज उन्हें छोटा साबित करने पर तुले रहते हैं. अपने इस आरोप की पुष्टि करने के लिए उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा था कि किस तरह एक शादी के कार्यक्रम में एक दूसरे जज ने अपने पैरों को यह सोचकर थोड़ा दूर कर लिया कि कहीं कर्णन का पैर उनसे छू न जाए.

नियुक्ति करने वाले जज की माफी
कर्णन और सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच की तनातनी तब और देखने को मिली जब कर्णन को बतौर जज नियुक्ति करने की सिफारिश करने वाले हाईकोर्ट कोलेजियम के तीन में से एक जज ने पिछले साल सार्वजनिक तौर पर कर्णन की नियुक्ति करने के लिए माफी तक मांग ली थी.

वहीं, 2016 में जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा उनके कोलकाता हाईकोर्ट में ट्रांसफर किए जाने के आदेश पर कहा था कि उन्हें दुख है कि वह भारत में पैदा हुए हैं और वह ऐसे देश में जाना चाहते हैं जहां जातिवाद न हो.

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