कंगना के ‘बग़ावती तेवर’ उन्हें रानी लक्ष्मीबाई के क़रीब लाते हैं: प्रसून...

कंगना के ‘बग़ावती तेवर’ उन्हें रानी लक्ष्मीबाई के क़रीब लाते हैं: प्रसून जोशी

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कंगना रनौत अपनी आने वाली फ़िल्म ‘मणिकर्णिका-द क्वीन ऑफ झांसी’ के पोस्टर रिलीज़ के लिए गुरुवार को वाराणसी में थीं. उनके साथ फ़िल्म से जुड़े और भी लोग वहां मौजूद थे.

फ़िल्म के निर्देशक कृष, लेखक के वी. विजयेंद्र प्रसाद, गीतकार और संवाद लेखक प्रसून जोशी आदि ने भी वाराणसी की शाम का लुत्फ़ उठाया.

फ़िल्म ‘मणिकर्णिका- द क्वीन ऑफ झांसी’ के संवाद और गीत लिख रहे लेखक प्रसून जोशी ने कंगना रनौत को बहुमुखी प्रतिभा की धनी बताया.

यह पूछे जाने पर कि कंगना ही लक्ष्मीबाई के लिए सही विकल्प क्यों हैं, जोशी ने कहा, “मैं कंगना रनौत को मौजूदा दौर की बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री मानता हूं. वह किसी भी तरह की भूमिका निभा सकती हैं,”
प्रसून इससे पहले ‘भाग मिल्खा भाग’ की पटकथा लिखने के साथ ही ‘रंग दे बसंती’ और ‘नीरजा’ जैसी कई फ़िल्मों के गीत लिख चुके हैं. प्रसून ने कहा कि कंगना के ‘बगावती तेवर’ उन्हें रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका से जोड़ने में मदद करेंगे.

‘बाहुबली : द बिगनिंग’ और ‘बाहुबली 2 : द कन्क्लूजन’ जैसी फ़िल्में लिख चुके वी. विजयेंद्र प्रसाद ने प्रसून जोशी के साथ ‘मणिकर्णिका-द क्वीन ऑफ झांसी’ के संवाद लिखे हैं.

उन्होंने कहा कि कंगना स्वभाव से ‘रानी’ हैं, इसलिए वह फिल्म के लिए बिल्कुल सटीक पसंद हैं.

अभिनेत्री कंगना रनौत इस बात से इत्तेफ़ाक रखते हुए कहा हैं कि वह बगावती हैं. यही वह चीज है, जो उन्हें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से जोड़ती है, “मैं सहमत हूं कि मैं बगावती हूं, लेकिन रानी लक्ष्मी बाई भी एक ख़ास मक़सद को लेकर विद्रोही थीं, जिसने उन्हें ‘हीरो’ बनाया.”

बॉलीवुड में पीरियड फ़िल्मों के चलन पर कंगना ने कहा, “ऐसी फ़िल्में लोगों को पसंद आ रही हैं. ‘बाहुबली’ को देखें. फ़िल्म ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. लेकिन ईमानदारी से कहूं तो ‘मणिकर्णिका-द क्वीन ऑफ झांसी’ किसी परियोजना की तरह नहीं है.”

अपनी बायोपिक के बारे में कंगना ने कहा, “मैं व्यक्तिगत तौर पर महसूस करती हूं कि मुझे अभी लंबा रास्ता तय करना है. मुझे अब भी लगता है कि मैं ऐसी जगह नहीं हूं, जहां मुझे होना चाहिए. मैं फ़िल्म निर्माण करना चाहती हूं.”
देशभक्ति पर बनाई जा रही फिल्मों के संदर्भ में प्रसून जोशी ने कहा, “देशभक्ति को केवल कुछ दिनों या समारोहों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए, यह एक ऐसी चीज है, जिसे आप जीते हैं और सांस लेते हैं, यह एक एहसास है, यह मेरे देश या प्रतीक चिह्नें को लेकर नहीं है. यह सही और गलत को लेकर भी है,”

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