सामाजिक, धार्मिक परिदृश्य में परिवर्तन एवं जिम्मेवारियों को लेकर दिल्ली में मंथन

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सामाजिक, धार्मिक परिदृश्य में परिवर्तन एवं जिम्मेवारियों को लेकर दिल्ली में मंथन
सामाजिक, धार्मिक परिदृश्य में परिवर्तन एवं जिम्मेवारियों को लेकर दिल्ली में मंथन

कोई भी धर्म सामाजिक को तोड़ने की बात नहीं करता है। धर्म समाज को एकजुट करने की बात करता है। धर्म के मार्ग पर चलकर सामाजिक की सभी कुरीतियों को दूर किया जा सकता है। कुछ इस तरह से समाज निर्माण की परिकल्पना दुनिया भर से आए विशेषज्ञों ने “सामाजिक, धार्मिक परिदृश्य- परिवर्तन एवं जिम्मेवारियां” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में की। सेमिनार का आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में सद्भावना सेवा संस्थान और इंटरफेथ फाउंडेशन के संयुक्तत्वाधान किया गया। आयोजन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी चार सत्रों में संपन्न हुआ।

सदभावना सेवा संस्थान के चेयरमैन अनिल सिंह ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, आज हम जिस सामाजिक-धार्मिक परिदृश्य में परिवर्तन और अपने सामाजिक दायित्व की बात कर रहे हैं तो हमारी संस्था सदभावना सेवा संस्थान का उदय ही इसी के मद्देनजर हुआ है। मेरा मानना है कि सेवा परम धर्म है। हमारे आंदिग्रंथों में भी समाज के प्रति राज्य की जिम्मेदारी और व्यक्ति के स्तर पर व्यक्ति के कर्तव्यों का स्पष्ट संकेत मिलता है, लेकिन पिछले कई वर्षों से इस धरती पर सामाजिक धार्मिक परिदृश्य में बहुत तेजी से परिवर्तन आ रहा है। दुख की बात यह है कि समाज इस परिवर्तन के अनुरूप तैयार नहीं है। हमारे आदि ग्रंथों में समाज और राज्य की जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से बताया गया है, आज हमें उन्हें प्रकाश में लाने की जरूरत है। हर समाज का एक धर्म होता है और हर धर्म एक आदर्श समाज का निर्माण करना चाहता है। वर्तमान परिदृश्य की समीक्षा में समाज और धर्म के संयुक्त स्वरूप की समीक्षा आवश्यक है। जब समाज की बात होती है तो अर्थव्यवस्था, राज्य व्यवस्था, विधि व्यवस्था और समाज व्यवस्थाएं स्वत: इसमें शामिल हो जाती हैं। हमारे राज्य का लक्ष्य एवं दिशा और समाज के लक्ष्य और दिशा के बीच समन्वय की आवश्यकता है।

संविधान में हमने समानता, समता, स्वतंत्रता, न्याय और व्यक्ति की गरिमा को उच्च मूल्य प्रदान किया है, लेकिन विगत 20-30 वर्षों में राज्य ने मुख्य रूप से विज्ञान-प्रौद्योगिकी और अधीसंरचनात्मक विकास किया है ऐसा लगता है संविधान की अपेक्षाएं इसमें पूरी नहीं हो पाई हैं और इसका प्रभाव व्यक्ति और समाज के व्यवहार पर भी पड़ा है, परिवारिक जीवन भी नये अर्थ ग्रहण कर रहा है। ऐसा लगता है कि विकास जिस तेजी से हुआ है, जीवन में गति तो बढ़ी है, उस हिसाब से हमारे परिवार, समाज और राज्य तैयार नहीं है, यह कुछ लोगों के लिए कल्चरल शॉक और कुछ के लिए स्वतंत्रता है। कुछ भ्रम और दिग्भ्रम की स्थिति है। हमें विचार करना होगा कि हम कैसा राज्य और कैसा समाज बनाना चाहते हैं। अपनी जिम्मेदारियों को पहचानने और परिवर्तन की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए ही यहां यह विमर्श हो रहा है। सरोकारविहीन हम कैसे रह सकते हैं? हमें परिवार भी चाहिए, संबंध भी चाहिए और एक श्रेष्ठ समाज भी तथा सुरक्षित-समृद्ध राष्ट्र भी।

प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहमद खान थे। इन्होंने सामाजिक, धार्मिक परिपेक्ष्य में आर्दश समाज की बारिकियों को समझाने का प्रयास किया। इस सत्र की अध्यक्षता इंटरफेथ फाउंडेशन के अध्यक्ष मदन मोहन वर्मा ने भी इस दिशा में अपनी जिम्मेवारियों को समझाने पर बल दिया। इस सत्र में स्वामी सच्चिदानंद, ताहिर मोहमद खान, प्रो. दीपाली भनोट, एसएन साहू ने भाग लिया।

दूसरे सत्र की अध्यक्षता जेएनयू के प्रो. आरपी सिंह ने किया। जबकि यूएन हैबिटेट के प्रमुख मार्कंडेय राय ने कहा कि पूरी व्यवस्था में बदलाव की पहली कड़ी परिवार है। परिवार संस्था की मजबूती के वगैर समाज, देश और दुनिया की बात नहीं कर सकते हैं। संयुक्त परिवार को हम क्यों खोते जा रहे हैं। उन्होंने परिवार संगठित होने की बात कही। करीब करीब सभी वक्ताओं ने धर्म को कल्याण के मार्ग का रास्ता बताया।

तीसरे सत्र की अध्यक्षता एल्कॉन इंटरनेशनल के प्राचार्य अशोक पांडेय की। जबकि मशहूर शायर एवं टीवी पत्रकार तहसीन मुन्नव्वर ने अपने शायराने अंदाज में सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि मजहब नहीं सिखाता की हम एक दूसरे से लड़ें। मैं उस मजहब को नहीं मानता जो आपस बैर सिखाए। रेल चलाने वाला, जहाज चलाने वाला अपने यात्री के मजहब को नहीं पुछता है। वह अपने धर्म का पालन करता है।

सेमिनार में विक्रम दत्त, जेएस राजपुत, प्रो. फरीदा खानम, अर्चना गौड़, हेमा रागराघवन, प्रो. मधु खन्ना,  मनु सिंह, सुफी अजमल निजाम, मेजर जनरल पीके सहगल, वरिष्ठ पत्रकार रजनीकांत वर्मा, जनार्दन यादव, सत्येंद्र प्रकाश, सीवी तिवारी, सहित भारी संख्या में छात्र, छात्राओँ ने हिस्सा लिया।

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